म्यूचुअल फंड में निवेश का नया दौर: SEBI ने महिला और छोटे शहरों के निवेशकों के लिए बदले नियम

SEBI relaxes educational qualifications for investment advisors; advisors with more than 300 clients will be considered non-individuals

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मुंबई:   बाज़ार नियामक SEBI (सेबी) ने म्यूचुअल फंड उद्योग में पहुँच और जागरूकता बढ़ाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सेबी ने म्यूचुअल फंड वितरकों (डिस्ट्रीब्यूटर्स) के लिए इंसेंटिव स्ट्रक्चर  (Incentive Structure) में बदलाव किया है। यह बदलाव मुख्य रूप से दो प्रमुख वर्गों – B30 शहरों (शीर्ष 30 शहरों से बाहर) के नए व्यक्तिगत निवेशक और सभी शहरों की नई महिला निवेशक – को म्यूचुअल फंड से जोड़ने पर केंद्रित है।

आम निवेशकों के लिए यह खबर क्यों महत्वपूर्ण है? क्योंकि वितरकों को मिलने वाले इस अतिरिक्त प्रोत्साहन से वे इन दोनों ही महत्वपूर्ण वर्गों तक पहुंचने के लिए अधिक प्रयास करेंगे। इससे छोटे शहरों और महिला निवेशकों के लिए म्यूचुअल फंड में निवेश करना और आसान हो जाएगा, साथ ही उन्हें बेहतर मार्गदर्शन मिलने की भी उम्मीद है।

✨ नए इंसेंटिव स्ट्रक्चर की मुख्य बातें

सेबी का यह नया ढांचा 1 फरवरी 2026 से प्रभावी होगा। इसमें वितरकों को मौजूदा ट्रेल कमीशन (Trail Commission) के अलावा अतिरिक्त भुगतान मिलेगा।

  • पात्र निवेशक:

    1. B30 शहरों (Tier-2 और Tier-3 शहरों) से आने वाले नए व्यक्तिगत निवेशक (New PAN).

    2. सभी शहरों (शीर्ष 30 और B30) से आने वाली नई महिला व्यक्तिगत निवेशक (New PAN).

  • कितना मिलेगा अतिरिक्त कमीशन?

    • एकमुश्त निवेश (Lump-sum) पर: पहले एकमुश्त निवेश का 1%, जो अधिकतम ₹2,000 तक हो सकता है।

    • SIP पर: पहले वर्ष में किए गए कुल SIP निवेश का 1%, जो अधिकतम ₹2,000 तक हो सकता है।

  • शर्त: निवेशक को कम से कम एक वर्ष तक निवेश बनाए रखना होगा। अगर निवेशक एक साल से पहले पैसा निकालता है, तो वितरक को मिला यह अतिरिक्त कमीशन वापस (claw-back) लिया जा सकता है।

  • फंडिंग (Funding Source): यह अतिरिक्त कमीशन एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMCs) द्वारा निवेशक शिक्षा और जागरूकता के लिए अलग से रखे गए 2 आधार अंक (Basis Points) के फंड से दिया जाएगा। यानी, यह सीधे तौर पर फंड के सामान्य खर्च अनुपात (Total Expense Ratio – TER) को प्रभावित नहीं करेगा।

🛡️ दुरुपयोग रोकने के लिए ‘गार्डरेल्स’

सेबी ने यह बदलाव पहले से मौजूद B30 प्रोत्साहन ढांचे के संभावित दुरुपयोग (misuse) की चिंताओं को दूर करने के लिए किया है। पहले का ढांचा निवेश की नई आवक (New Inflows) पर आधारित था, जिससे ‘चर्निंग’ (बार-बार स्कीम बदलना) जैसी गलत प्रथाओं की आशंका थी।

नए नियम में दुरुपयोग को रोकने के लिए सख्त प्रावधान किए गए हैं:

  1. नया पैन अनिवार्य: प्रोत्साहन केवल नए व्यक्तिगत निवेशकों (जिनके पास पहले म्यूचुअल फंड निवेश के लिए PAN नहीं था) को लाने पर ही मिलेगा।

  2. दोहरे प्रोत्साहन पर रोक: B30 शहर की महिला निवेशक के लिए, वितरक केवल एक ही प्रोत्साहन (या तो B30 निवेशक के लिए या नई महिला निवेशक के लिए) का दावा कर सकता है। दोहरे लाभ की अनुमति नहीं होगी।

  3. स्कीम पर प्रतिबंध: एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETFs), कुछ फंड ऑफ फंड्स (FoFs), और बहुत कम अवधि की डेट स्कीम्स (जैसे ओवरनाइट, लिक्विड, अल्ट्रा-शॉर्ट, और लो-ड्यूरेशन फंड) पर यह अतिरिक्त कमीशन लागू नहीं होगा। यह प्रतिबंध सुनिश्चित करता है कि प्रोत्साहन दीर्घकालिक भागीदारी (long-term participation) को बढ़ावा दे।

💡 आम निवेशक को क्या फायदा?

यह कदम सीधे तौर पर निवेशकों के लिए कोई छूट नहीं देता है, लेकिन यह कई तरह से फायदेमंद है:

  • बढ़ेगी जागरूकता: वितरक छोटे शहरों और महिला निवेशकों के पास जाकर उन्हें म्यूचुअल फंड के फायदों के बारे में समझाएँगे, जिससे वित्तीय साक्षरता (Financial Literacy) बढ़ेगी।

  • बेहतर सलाह की उम्मीद: प्रोत्साहन एक वर्ष तक निवेश बनाए रखने की शर्त पर है, जो वितरकों को ग्राहकों को सही सलाह देने और उन्हें कम समय में पैसा न निकालने के लिए प्रेरित करेगा।

  • सरल होगी निवेश प्रक्रिया: दूरदराज के क्षेत्रों में पहुंचने के लिए, वितरक निवेश की प्रक्रिया को और भी सरल और सुलभ बनाने का प्रयास करेंगे।

कुल मिलाकर, सेबी का यह फैसला भारत में म्यूचुअल फंड की पहुँच को केवल बड़े शहरों से निकालकर देश के कोने-कोने तक ले जाने की दिशा में एक बड़ा और संतुलित प्रयास है।

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By MFNews

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